मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को सोने के बंधक पर दिए जाने वाले कर्ज (गोल्ड लोन) को विनियमित करने के लिए व्यापक मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत सभी वित्तीय संस्थाओं के लिए लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात 75% तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, सोने की शुद्धता, ऋण की समीक्षा और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नए मानक भी तय किए गए हैं।
इन प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में मुख्य रूप से दो पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पहला पहलू वित्तीय सुरक्षा से संबंधित नियमों का है, जिसमें कर्ज की राशि, कोलैटरल का मूल्यांकन और जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल हैं। दूसरा पहलू ग्राहकों के साथ व्यवहार संबंधी नियमों (कंडक्ट रिलेटेड एस्पेक्ट्स) का है, जिसमें पारदर्शिता, उचित व्यवहार और ग्राहक संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आरबीआई ने इन मसौदा दिशा-निर्देशों को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया है, ताकि विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर इन्हें अंतिम रूप दिया जा सके।
गोल्ड लोन बांटने वाली एनबीएफसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट
इस घोषणा के बाद गोल्ड लोन एनबीएफसी के शेयरों में गिरावट देखी गई। बुधवार को बाजार बंद होने पर मुथूट फाइनेंस के शेयर 6.78% नीचे, आईआईएफएल फाइनेंस 2.5% गिरावट के साथ और मणप्पुरम फाइनेंस का शेयर 1.86% नीचे बंद हुआ।
गोल्ड लोन पर आरबीआई के ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें
- LTV अनुपात 75% पर सीमित
- सभी गोल्ड लोन (आय उत्पन्न करने वाले और उपभोग उद्देश्य दोनों) के लिए LTV अनुपात 75% से अधिक नहीं होगा। यह सीमा ऋण की पूरी अवधि के दौरान लागू रहेगी।
- सोने की गुणवत्ता और बंधक नियम
- ऋणदाताओं को सोने की शुद्धता के मानक तय करने होंगे।
- प्राथमिक सोने/चांदी (बुलियन) या गोल्ड ETF/म्यूचुअल फंड यूनिट्स के बदले ऋण नहीं दिया जा सकेगा।
- संदिग्ध स्वामित्व वाले सोने या दोबारा गिरवी रखे गए सोने पर भी ऋण नहीं मिलेगा।
- पोर्टफोलियो सीमा और जोखिम प्रबंधन
- बैंकों और एनबीएफसी को गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की अधिकतम सीमा तय करनी होगी।
- एकल उधारकर्ता को दिए जाने वाले ऋण की सीमा भी निर्धारित करनी होगी।
- ऋण का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए फंड्स के एंड-यूस पर नजर रखनी होगी।
- LTV उल्लंघन पर अतिरिक्त प्रावधान
- यदि LTV सीमा का उल्लंघन होता है, तो ऋणदाताओं को 1% अतिरिक्त प्रावधान करना होगा।
आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ए एम कार्तिक के मुताबिक, “75% एलटीवी सीमा से गोल्ड लोन एनबीएफसी की विकास दर पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बड़ी कंपनियां इसे मैनेज कर सकती हैं।“
बता दें, गोल्ड लोन मुख्यत: दो उद्देश्यों के लिए दिए जाते हैं – पहला, व्यक्तिगत उपभोग जैसे शादी-ब्याह या चिकित्सा खर्चों के लिए, और दूसरा, आय अर्जित करने वाली गतिविधियों जैसे कि व्यवसाय में निवेश के लिए। आरबीआई ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि वर्तमान में विभिन्न विनियमित संस्थाओं (रेगुलेटेड एंटिटीज) जैसे बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFCs) आदि के लिए गोल्ड लोन से संबंधित नियम अलग-अलग हैं। इन नियमों में एकरूपता लाने और कुछ देखी गई समस्याओं के समाधान के लिए ये नए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
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