नई दिल्ली। क्या आप ओला-उबर की खराब सेवा से तंग आ चुके हैं? यदि हां, तो यह आपके काम की खबर है। ओला और उबर जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों को चुनौती देने के लिए एक देश में जल्द ही एक नई सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा ‘सहकार टैक्सी’ शुरू होने जा रही है। यह सेवा ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लेगी और इसके चलते यह यात्रियों को कम कीमत पर सेवा मुहैया करा सकेगी। खास बात ये है कि यह सेवा केंद्र सरकार के सहाकारिता विभाग के पहल पर शुरू की जा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने खुद इसका ऐलान किया है।
क्या है सहकार टैक्सी?
- यह एक बहु-राज्यीय सहकारी समिति (MSCS) के तहत पंजीकृत होगी, जिसमें ड्राइवर सदस्य और मालिक होंगे।
- ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स 20-40% कमीशन काटते हैं, लेकिन सहकार टैक्सी में ड्राइवरों को पूरी कमाई मिलेगी।
- इसे राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
- ड्राइवर शेयर खरीदकर इसके हिस्सेदार बनेंगे और प्लेटफॉर्म को चलाने में भूमिका निभाएंगे।
कैसे काम करेगी सहकार टैक्सी?
- यूजर्स ऐप के जरिए बाइक, ऑटो या कार बुक कर सकेंगे।
- ड्राइवरों को वाहन खरीदने के लिए लोन सुविधा भी मिलेगी।
- यह सेवा तीन महीने के भीतर शुरू कर दी जाएगी।
यह भी पढ़ें: 1 अप्रैल से लागू होंगे प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिग के नए नियम, जानिए किसको होगा फायदा
विशेषज्ञों की मानें तो सहकार टैक्सी ओएनडीसी पर आधारित हो सकती है। इसके भागीदार ड्राइवरों को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा जैसी सुविधाएं भी मिलने की उम्मीद है।
ऐप आधारित टैक्सी सेवा में फिलहाल ओला और उबर की 50% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है। जहां ड्राइवरों को कमीशन और सब्सक्रिप्शन फीस का बोझ उठाना पड़ता है। इन कंपनियों के खिलाफ कई बार ड्राइवर आंदोलन भी कर चुके हैं। वहीं, कई बार यात्रियों को भी इनकी खराब सेवाओं के चलते परेशानी उठानी पड़ती है।
बता दें, भारत का टैक्सी सेवा का बाजार इस साल 20.61 अरब डॉलर होन का अनुमान है। यहां से साल 2033 तक इसमें 13.55% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
मनीलाभ डॉट कॉम में सीनियर कॉपी रॉइटर। बिजनेस पत्रकारिता में तीन साल का अनुभव। मनीलाभ से पहले राजस्थान पत्रिका में बतौर सब एडिटर काम किया। खाली समय में पढ़ना और घूमना पसंद है।

