नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगमन के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल के बीच सोने का दाम तेजी के मामले में 37 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुका है। वर्ष 2025 की पहली तिमाही में सोने का दाम 18.84% उछला है, जो कि 1988 की तीसरी तिमाही में सोने की कीमतों में आई तेजी के बाद सबसे अधिक हैं। MCX गोल्ड भी अब तक 17.01% चढ़ चुका है। यहां से सोने की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह सवाल ज्यादातर निवेशकों के मन में है।
केडिया एडवाइजरी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतों में तेजी का सिलसिला फिलाहल थमने के आसार नहीं हैं। केडिया एडवाइजरी ने अपने गोल्ड आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि यहां से सोना इस साल के अंत तक 12% तक और उछल सकता है।

क्यों बढ़ रहा है सोने का दाम
केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने की कीमतों को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रही है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ युद्ध ने बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है। अप्रैल 2025 में अमेरिका ने चीनी सामानों पर 125% टैरिफ लगाया, जिसके जवाब में चीन ने भी 84% की प्रतिशोधक फीस घोषित की। इससे निवेशकों ने सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की ओर रुख किया है। साथ ही अमेरिकी मुद्रास्फीति (CPI) में अप्रैल 2025 में 0.1% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें कम करने की उम्मीदें बढ़ी हैं। यह सोने के लिए अनुकूल स्थिति है, क्योंकि कम ब्याज दरें डॉलर को कमजोर करती हैं और सोने की कीमतों को बढ़ावा देती हैं।
भूराजनीतिक संघर्ष से भी उछल रहा सोने का दाम
भू-राजनीतिक संघर्ष भी सोने की मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव ने सोने की मांग को बढ़ावा दिया है। अप्रैल 2025 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ नया हमला किया, जबकि इजरायल-गाजा संघर्ष भी जारी है। नाटो और अमेरिकी सेना की तैनाती ने वैश्विक स्तर पर अस्थिरता को और बढ़ा दिया है, जिससे निवेशक सोने जैसे सुरक्षित संपत्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और सोने का दाम बढ़ रहा है।
केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद जारी
केंद्रीय बैंकों की बढ़ती मांग सोने की कीमतों को स्थिरता प्रदान कर रही है। पोलैंड, चीन, तुर्की और जॉर्डन जैसे देशों ने 2025 में भी सोने की खरीद जारी रखी है। चीन ने लगातार चौथे महीने 5 टन सोना खरीदा, जबकि पोलैंड ने 11वें महीने तक 29 टन का अधिग्रहण किया। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक सोने को अपने भंडार में शामिल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
डी-डॉलराइजेशन का प्रभाव भी सोने की कीमतों को बढ़ाने में योगदान दे रहा है। अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए कई देश सोने को अपने भंडार में शामिल कर रहे हैं। चीन, रूस और BRICS देशों ने इस रणनीति को तेजी से अपनाया है, जिससे सोने की मांग में वृद्धि हुई है।
सोने के दाम का टेक्निकल एनालिसिस
टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार, सोने (Gold $) ने कप एंड हैंडल पैटर्न को तोड़ते हुए 3,218 डॉलर का स्तर छू लिया है। अगला प्रतिरोध 3,370 डॉलर और 3,520 डॉलर पर देखा जा सकता है। समर्थन स्तर 2,340 डॉलर और 2,710 डॉलर पर हैं। MCX गोल्ड के लिए प्रमुख स्तर 68,000 रुपये (समर्थन) और 98,000 रुपये (प्रतिरोध) हैं।
निवेशकों के लिए सुझाव के तौर पर, लॉन्ग-टर्म निवेशक सोने में निवेश जारी रख सकते हैं, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को RSI (83.65) के ओवरबॉट होने के कारण अस्थायी गिरावट का ध्यान रखना चाहिए। केडिया एडवाइजरी के अनुसार, सोने की कीमतें 2,340 डॉलर से 3,520 डॉलर के बीच रह सकती हैं।
सोने के दाम पर केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट यहां देखें
मनीलाभ डॉट कॉम में एसोसिएट एडिटर। बिजनेस पत्रकारिता में डेढ़ दशक का अनुभव। इससे पहले दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और लोकमत समाचार में बिजनेस बीट कवर कर चुके हैं। जब बिजनेस की खबरें नहीं लिख रहे होते तब शेर और कहानियों पर हाथ आजमा रहे होते हैं।

